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पत्थर पे आग बरसती है, खुदा जाने कब बरसात होगी || उसके खत तो रोज मिलते है, खुदा जाने कब मुलाकात होगी ||

मुलाकात तो रोज होती है, फर्क इतना है जिस्म नहीं मिलते || मेरी रूह उनके पास है, फर्क इतना है वो याद नहीं करते ||

में जा बसा पहाड़ पे, तुम गंगा के तट || अब तो मिलन कठिन है, पेरो में पड़ी जंजीर ||

इश्क़ की बेड़ी है, चाहत की जंजीर है || में तुम्हे चाहता हूँ, आगे मेरी तकदीर हैं ||

तुम्हे कसम हैं मेरी जान, मेरे पहलुओं से यू ना सरको || सरको तो ऐसे सरको , कलम कर दो मेरे सर को ||

कटे नहीं कटती हैं तन्हाई की राते, याद मुझे भी आती है वो जुदाई की राते || ना रात को नींद,ना दिन को सकून, डसती थी मुझे भी वो नागन सी काली राते ||

जख्मी दिल वो किताब है, जो अश्क़ो से लिखी गयी हैं,|| हर्फ़ बने हैं इसका वो जख्म, जो बेवफा बेइन्तहा हो गया हैं ||

वो चले बिजली गिरा कर, हम दिल थाम कर बैठ गये || उन्होंने दिये जख्म हमे, मुस्करा कर बैठ गये ||

अपनों से खाये जख्म तो, आदत सी हो गयी जख़्म खाने की || इतनी ठोकर लगी हैं हमें अब तो, आदत सी हो गयी चोट खाकर मुस्कुराने की ||

बदल गयी दासता, महज फर्क इतना हैं|| दो कदम की दुरी, रास्ता मोत जितना हैं ||

शमा बदली तो, शमा फजल बदल गयी || जिस नजर की थी आरजू, आज वो नज़र बदल गयी ||

जो दाग माथे पर हैं, उसे पसीने से मिटाना हैं || जो इज्जत दुब गयी हैं , उसे किनारे पे लगाना हैं ||

तहजीब से तहजीब सीखी, सिर झुकाना आ गया || उनसे जो मिली नजर, हमें मुस्कुराना आ गया ||

इश्क़ का ये असर हैं खुदा, हम दायरा तहजीब का भूल गये || जब से वो आये मेहमा बनकर, हम मुस्कुराने भूल गये ||

आंखों में लाज का गहना, होठो में चाहत की प्यास हैं || में तो करीब हूँ तेरे, फिर क्यों तेरा चेहरा उदास है ||

डूब चुके कितने अफ़साने, इन आँखों को पाने मै || जिक्र तलक न आया मेरा, जमाने की किसी कहानी मै ||

इस कदर मिले जख़्म, भूल गये हम नाम-ए-वफ़ा || याद हैं तो महज इतना, मिली थी कभी एक बेवफा ||

हमे बर्बाद करके हसने वाले, जश्न कामयाबी का मनाते हैं, जीते जी ताज उठाया सागर, हम मर कर भी ताज उठाते हैं ||

सिर उठाकर जीते थे, अब सिर झुकाकर चलना पड़ता हैं || कभी जीते थे इनके नाम पे, अब इनके नाम पे मरना पड़ता हैं ||

मोत भी आती नहीं सागर, नाकाम मुहब्बत होती हैं || ये मनाते हैं जश्न-ए-कामयाबी, बरबाद मुहब्बत रोती हैं ||

हुस्न वालो ने ही सागर, ये हालात मेरी बतायी है || पहले किया प्यार हमसे, फिर चिता मेरी सजायी है ||

हुस्न वालो से कोई गिला नहीं, इनकी फितरत तो बेवफाई है || कोई वफ़ा करे या ना सही, इनकी आदत तो बेवफाई है ||

हसीनो को करीब से देखा है, इनके पास बेवफाई है || जिन्होंने प्यार किया है इनसे || उन्होने उसकी कब्र बनाई है ||

मुहब्बत लायी है कब्रिस्तान मै मुझे, प्यार ने मैय्यत मेरी सजायी है || जिससे मेने की थी वफ़ा, उसने मुझसे की बेवफाई है ||

जी जी कर मरे प्यार में, कदम कदम पे धोखा खाया है || कुछ भी नहीं है पास मेरे, बस खली पैमाना पाया है ||

मौत से भी ए साकी, रिश्ता अजीब सा लगता है || वो अब भी मेरे अपने है, रिश्ता अजीब सा लगता है ||

दिल्लगी भी करके देख ली, भुला न पाये यार उन्हें || सब कुछ भूल गये सागर, बस भुला न पाये यार उन्हें ||

मौत भी बेवफा है सागर, अब वो भी करीब नहीं आती || पहले आती थी याद उनकी, अब याद भी उनकी आती नहीं ||

इश्क़ करना आसान नहीं होता, इश्क़ धोखा और फरेब है || बू आती है चाहत से उनकी, चाहत उनकी धोखा फरेब है ||

Tere golden face ki beauty ne,Mere komal heart pe attack kiya,Sabko reject kiya tumko select kiya,Request hai tumse Isse refuse na karna,Mere pyar ke is bulb ko kabhi fuse na karna.तेरे गोल्डेन फेस की ब्यूटी ने,मेरे कोमल हार्ट पे अटैक किया,सबको रिजेक्ट किया तुमको सिलेक्ट किया,रिक्वेस्ट है तुमसे इसे रिफ्यूज ना करना,मेरे प्यार के इस बल्ब को कभी फ्यूज ना करना।।

ऐसा ना हो तुझको भी दीवाना बना डाले,तन्हाई में खुद अपनी तस्वीर न देखा कर।

कैसे बयान करें सादगी अपने महबूब की,पर्दा हमीं से था मगर नजर भी हमीं पे थी।

नजर से जमाने की खुद को बचानाटकिसी और से देखो दिल ना लगाना,के मेरी अमानत हो तुम,बहुत खूबसूरत हो तुम..।।

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं रात भर,कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता।

तुझे पलकों पे बिठाने को जी चाहता हैतेरी बाहों से लिपटने को जी चाहता है,खूबसूरती की इंतेहा हैं तू,तुझे ज़िन्दगी में बसाने को जी चाहता है.

इस डर से कभी गौर से देखा नहीं तुझको​,​​​कहते हैं कि लग जाती है अपनों की नज़र भी​।

तुम हक़ीकत नहीं हो हसरत हो,जो मिले ख़्वाब में वही दौलत हो,किस लिए देखती हो आईना,तुम तो खुदा से भी ज्यादा खूबसूरत हो।

वो शरमाई सूरत वो नीची निगाहें,वो भूले से उनका इधर देख लेना।

तरस गये आपके दीदार को,दिल फिर भी आपका इंतज़ार करता है,हमसे अच्छा तो आपके घर का आईना है,जो हर रोज़ आपका दीदार करता है।

सुर्ख आँखो से जब वो देखते है,हम घबराकर आँखे झुका लेते है,क्यू मिलाए उन आँखो से आखे,सुना है वो आखो से अपना बना लेते है।

शोख़ी से ठहरती नहीं क़ातिल की नज़र आज,ये बर्क़-ए-बला देखिए गिरती है किधर आज।

कितना हसींन चाँद सा चेहरा है,उसपे शबाब का रंग गहरा है,खुदा को यक़ीन ना था वफा पे,तभी तो एक चाँद पे हजारों तारों का पहरा है।।

हमदम तो साथ-साथ चलते हैं,रास्ते तो बेवफा बदलते हैं,तेरा चेहरा है जब से आंखों मेंमेरी आंखों से लोग जलते हैं.

कुछ अपना अंदाज हैं कुछ मौसम रंगीन हैं,तारीफ करूँ या चुप रहूँ जुर्म दोनो ही संगीन हैं!

हर बार हम पर इल्जाम लगा देते हो मुहब्बत का,कभी खुद से भी पूंछा है इतनी खूबसूरत क्यों हो!

अगर तुम न होते तो ग़ज़ल कौन कहता,तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता,यह तो करिश्मा है मोहब्बत का..वरना पत्थर को ताज महल कौन कहता।

कितना खूबसूरत चेहरा है तुम्हारा,ये दिल तो बस दीवाना है तुम्हारा,लोग कहते है चाँद का टुकड़ा तुम्हें,पर मैं कहता हूँ चाँद भी टुकड़ा है तुम्हारा।

तुझे पलकों पे बिठाने को जी चाहता हैतेरी बाहों से लिपटने को जी चाहता है,खूबसूरती की इंतेहा हैं तू,तुझे ज़िन्दगी में बसाने को जी चाहता है।

उठती नहीं है आँख किसी और की तरफ,पाबन्द कर गयी है किसी की नजर मुझे,ईमान की तो ये है कि ईमान अब कहाँ,काफ़िर बना गई तेरी काफ़िर-नज़र मुझे।

यह मुस्कुराती हुई आँखेंजिनमें रक्स करती है बहार,शफक की, गुल की,बिजलियों की शोखियाँ लिये हुए।

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