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इन आंखो मे आंसू आये न होते, अगर वो पीछे मुडकर मुस्कुराये न होते, उनके जाने के बाद बस यही गम रहेगा, कि काश वो हमारी ज़िन्दगी मे आये न होते।

प्यार करने का हुनर हमें नहीं आता, इसलिए प्यार की बाज़ी हम हार गए, हमारी ज़िन्दगी से उन्हें बहुत प्यार था, सायद इसलिए हमे ज़िंदा ही मार गए!

हंसी छुपाना किसी को गवारा नहीं होता, हर मुसाफिर ज़िन्दगी का सहारा नहीं होता, मिलते है लोग इस तनहा ज़िन्दगी में पर, हर कोई दोस्त तुमसा प्यारा नहीं होता ।

किस हद तक जाना है ये कौन जानता है, किस मंजिल को पाना है ये कौन जानता है । दोस्ती के दो पल जी भर के जी लो, किस रोज़ बिछड जाना है ये कौन जानता है ।

ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता!

तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो ‘फ़राज़’ दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला!

शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ!

मशहूर हो जाते हैं वो जिनकी हस्ती बदनाम होती है, कट जाती है जिंदगी सफ़र में अक्सर जिनकी मंजिलें गुमनाम होती हैं

सैर कर दुनीया की गालिब, जिन्दगानी फिर कहा, जिन्दगानी गर रही तो, नौजवानी फिर कहा!

मुझे ख़बर थी मेरा इन्तजार घर में रहा, ये हादसा था कि मैं उम्र भर सफ़र में रहा…

चले थे जिस की तरफ़ वो निशान ख़त्म हुआ सफ़र अधूरा रहा आसमान ख़त्म हुआ…

एक सफ़र वो है जिस में पाँव नहीं दिल दुखता है

इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई हम न सोए रात थक कर सो गई

किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा

मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा.

दिल से मांगी जाए तो हर दुआ में असर होता है, मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनकी जिंदगी में सफ़र होता है.

उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा, दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है।

वो बेवफा हमारा इम्तिहान क्या लेगी, मिलेगी नजरों से नजरें तो अपने नजरे झुका लेंगी, उसे मेरी कब्र पर दिया मत जलाने देना, वो नादान है यारों, अपना हाथ जला लेगी.

गुजारिश हमारी वह मान न सके, मजबूरी हमारी वह जान न सके, कहते हैं मरने के बाद भी याद रखेंगे, जीते जी जो हमें पहचान न सके.

हमसे पूछो क्या होता हैं पल-पल बिताना, बहुत मुश्किल होता हैं दिल को समझाना, यार जिन्दगी तो बीत जायेगी, बस मुश्किल होता है कुछ लोगो को भूल पाना.

प्यार करने का हुनर हमे नही आता, इसलिए प्यार की बाज़ी हम हार गये, हमारी जिन्दगी से उन्हें बहुत प्यार था, शायद इसलिए हमे जिन्दा मार गये.

नादान इनकी बातो का एतबार ना कर, भूलकर भी इन जालिमो से प्यार न कर, वो कयामत तलक तेरे पास न आयेंगे, इनके आने का नादान तू इन्तजार न कर.

हाथ पकड़ कर रोक लेते अगर, तुझ पर जरा भी ज़ोर होता मेरा, ना रोते हम यूँ तेरे लिए अगर हमारी जिन्दगी में तेरे सिवा कोई और होता.

मेरी चाहत ने उसे ख़ुशी दे दे, बदले में उसने मुझे सिर्फ़ ख़ामोशी दे दी, ख़ुदा से दुआ मांगी मरने की लेकिन, उसने भी तड़पने के लिए जिन्दगी दे दी.

काश उन्हें चाहने का अरमान नहीं होता, मैं होश में होकर भी अंजान नाही होता, ये प्यार ना होता, किसी पत्थर दिल से, या फिर कोई पत्थर दिल इंसान ना होता.

चल आज तू मुझे अपना रहनुमा बना दे, इसी बहाने मेरी ज़िन्दगी भी ख़ुशनुमा बना दे.

टूट जाता है गरीबी में वो रिश्ता, जो ख़ास होता हैं, हजारों अपने मिलते हैं जब पैसा पास होता हैं.

अपनी तकदीर की आजमाइश ना कर, अपने गमो की नुमाइश ना कर, जो तेरा हैं तेरे पास खुद आएगा, रोज-रोज उसे पाने की ख्वाहिश ना कर.

ज़िन्दगी सुंदर हैं, पर सबको जीना नही आता, हर चीज में नशा है, पर पीना नही आता, सब मेरे बगैर जी सकते हैं बस मुझे ही किसी के बिना जीना नही आता.

तेरे वादे का तू जाने, मेरा वो ही इरादा हैं… जिस दिन साँस छूटेगी, उसी दिन आस टूटेगी…

रात गुमसुम हैं मगर ख़ामोश नही, कैसे कह दूँ आज फिर होश नही, ऐसे डूबा हूँ तेरी आँखों की गहराई में, हाथ में जाम हैं मगर पीने का होश नही…

वो छोड़ के गये हमें, न जाने उनकी क्या मजबूरी थी, ख़ुदा ने कहा, इसमें उनका कोई कसूर नही, ये कहानी तो हमने लिखी ही अधूरी थी…

चाहने की वजह कुछ भी नही… बस इश्क की फितरत हैं, बे-वजह होना…

ज़िन्दगी गुजर गई सारी कांटो की कगार पर… फूलो ने मचाई भी भीड़ तो आ के मज़ार पर…

आज ख़ुदा ने फिर पूछा तेरा हँसता चेहरा उदास क्यूँ हैं, तेरी आँखों में प्यास क्यूँ हैं जिस के पास तेरे लिए वक्त नही, वही तेरे लिए खास क्यूँ हैं.

तय है बदलना, हर चीज बदलती है इस जहां में, किसी का दिल बदल गया, किसी के दिन बदल गए।

यूं तो किसी चीज के मोहताज नही हम, बस एक तेरी आदत सी हो गयी है।

बिन दिल के जज्बात अधूरे, बिन धड़कन अहसास अधूरे, बिन साँसों के ख्वाब अधूरे, बिन तेरे हम कब हैं पूरे।

ज़ुल्फों को उंगलियों से किनारे किया ना कर दिल मेरा आवारा है इसे और बिगाड़ा ना कर।

आँखे खुली जब मेरी तो जाग उठीँ हसरतेँ सारी, उसको भी खो दिया मैँने..जिसे पाया था ख़्वाब मेँ।

बस यही दो मसले जिंदगी भर ना हल हुए, ना नींद पूरी हुई ना ख्वाब मुकम्मल हुए! ?

हमारी पसंद अपनी, निगाह से न तोलिये.. यह दिल के मामले हैं, इनमें न बोलिये!

ये कैसा सरूर है तेरे इश्क का मेरे मेहरबाँ, सँवर कर भी रहते हैं बिखरे बिखरे से हम!

रिश्ता बनाया है तो निभायेंगे, हर वक्त तुमसे लड़ेंगे और तुम्हे मनायेंगे! ?

रूठा हुआ है हम से इस बात पर ज़माना, शामिल नहीं है हमारी फ़ितरत में सर झुकाना।

​​हक़ से अगर दे तो ​नफरत​ भी सर आँखों पर​, खैरात में तो तेरी मोहब्बत भी मंजूर नहीं।

हम दुश्मनों को भी बड़ी शानदार सज़ा देते हैं, हाथ नहीं उठाते बस नज़रों से गिरा देते हैं।

तेरी मोहब्बत और मेरी फितरत में फर्क सिर्फ इतना है, कि तेरा ऐटीट्यूड नहीं जाता और मुझे झुकना नहीं आता।

जिगर वालों का डर से कोई वास्ता नहीं होता, हम वहाँ कदम रखते हैं जहाँ कोई रस्ता नहीं होता।

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