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रिश्तों के दलदल में से जब भी बाहर आया,हर साजिश के पीछे किसी न किसी अपने को ही पाया

जनाज़ा इसीलिए भारी था उस गरीब का,क्यूंकि वह सारे अरमान साथ लेकर चला गया

माना की तुम लफ़्ज़ों के बादशाह हो, मगर हम भी खामोशियों पर राज़ करते है

मेरी ज़िन्दगी के तालिबान हो तुम, बेमक़सद तबाही मचा रखी है

हम इतने बुरे इन्सान भी नहीं,जितना बक्त ने हमको बना दिया

उम्मीद न कर इस दुनिया में, किसी से हमदर्दी की, बड़े प्यार से जख्म देते है, शिद्दत से चाहने वाले

मौत भी हर बार ये कह कर मुझे छोड़ जाती है, की तुझे मारूँगी एक दिन पर पहले जीने तो लगो

एक दुःख पे हज़ार आंसू,उफ़ आँखों की ये फिझुज़ खर्चिया

जिस घाव से खून नहीं निकलता, समज लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है

तेरी मोहब्बत में हम रुसवा हुए इस कदर, कब्र तक जाना पड़ा कफन ओढ़कर

जिसने भी की है मोहब्बत की नौकरी, वेतन में उसे दर्द ही मिला ह

तू बदनाम ना हो इसलिए जी रहा हु मै, वरना मरने का इरादा तो रोज होता ह

करेगा ज़माना भी हमारी कदर एक दिन, बस ये वफादारी की आदत छूट जाने दो

मेरी खमोशियो के राज़ ख़ुद मुझे ही नहीं मालूम, जाने क्यू लोग मुझे मगरूर समझते है

सब छोड रहे है मुझे अपना बनाकर, ऐ धड़कन तुझे भी इजाजत है

जरुरत है कुछ नए नफरत करने वालो की,पुराने वाले चाहने लगे है मुझे

आज उसने हमें एक और दर्द दिया तो हमें याद आया की, दुआओं में हमने ही तो उसके सारे दर्द मांगे थे

आज महिफल शांत कैसे है दोस्तो, जख्म भर गये है या मोहब्बत फिर से मिल गयी

चलते रहेंगे क़ाफ़िले मेरे बग़ैर भी यहाँ, एक तारा टूट जाने से फ़लक़ सूना नहीं होता

आज दिल की Xerox निकलवाई, सिर्फ बचपन वाली तस्वीरें ही रंगीन नज़र आई

ये जो हर मोड़ पे आ मिलती है, बदनसीबी भी कहीं मेरी दीवानी तो नहीं

उसकी हसरतों को मेरे दिल में लिखने वाले, काश उसे भी हमारी तक़दीर में लिख दिया होता

दर्द बेचते है हम यहां लफ़्ज़ों में ढालकर, अगर चोट पहुँचे तो गुस्ताखी माफ़ कीजिये

तुम्हारा नाम लेने से सब लोग मुझे पहचान जाते है, मैं वो खोई हुई चीज हूँ, जिसका पत्ता सिर्फ तुम हो

ए खुदा ! तू रोज मेरे गुनाह गिना करता है,मुझे आने दे, तेरी नाइंसाफीयों का हिसाब भी हम करेंगे

मतलबी दुनिया के लोग खड़े है हाथों में पत्थर लेकर, मैं कहाँ तक भागूं शीशे का मुक़द्दर लेकर

मत पूछ की किस तरह चल रही है ज़िंदगी, उस दौर से गुज़र रही हु जो गुज़रता ही नहीं

हाथ में देखकर मरहम तेरे,सिने के मेरे जख्म हंसते है

वो तो पानी का एक कतरा है जो आँखों से बह गया, आँसू तो तुम हो जो तड़प कर आँखों में ही रह गया

आज उसने हमे एक और दर्द दिया तो हमे याद आया की,दुआओ में हमने ही तो उसके सारे दर्द मांगे थे

सबब रोने का वो पूछें तो बस इतना बता देना,मुझे हँसना नहीं आता जहाँ पर तुम नहीं होते

ये मासूमियत का कौन सा अन्दाज़ है, पंछी के पर काट कर कह दिया की अब तुम आजाद हो !

किसके साथ चलू और किसका हो जाऊ,इससे बहेतर है की अकेला रहू और तन्हा हो जाऊ

ये तो शौक है मेरा ददॅ लफ्जो मे बयां करने का, नादान लोग हमे युं ही शायर समझ लेते है

यूँ ही वो दे रहे है क़त्ल की धमकियाँ,हम कौन से ज़िंदा है जो मर जाएंग

एक ज़ख्मी परिंदे की तरह जाल में है हम,ऐ इश्क अभी तक तेरे जंजाल में है हम

दिल उदास है मगर मिलता है सब से हंसकर,यही एक अजब हुनर सिखा है बहुत कुछ खो देने के बाद

मैं कड़ी धुप में चलता हूँ इस यकींन के साथ,मैं जलुगा तभी तो मेरे घर में उजाले होंगे

सो जायेंगे वो बच्चे भूखे, फुटपाथ पर कल भी,ये सांता क्लाज गिफ्ट में रोटी जो नहीं बाँटता है

  दीवार का कैलेंडर तो बदलता है हर साल,ए-ख़ुदा अब के बरस हालात भी तो बदल दे

  रोज़ पिलाता हूँ एक ज़हर का प्याला उसे,एक दर्द जो दिल में है मरता ही नहीं है

मैं छुपाना जानता तो जग मुझे साधू समझता,शत्रु मेरा बन गया है छलरहित व्यवहार मेरा

  किस जुर्म में छीनी गई मुझसे मेरी हँसी,मैने तो किसी का दिल दुखाया भी ना था

रजाईयां नहीं है उनके नसीब में,गरीब गर्म हौंसले ओढ़कर सो जाते है

आज तक उस थकान से दुःख रहा है बदन,एक सफ़र किया था मैंने ख्वाहिशो के साथ

कभी कभी हदसे ज्यादा अच्छा होना भी गुनाह होता है,ये आज हमनें भी जाना है मेरे दोस्त

ऐ तकदिर आ तेरे पैरों को मरहम लगा दूँ,कुछ चोंटे तूझे भी आई होंगी मेरे सपनों को ठोकर मारते मारते

वो कहता है की बता तेरा दर्द कैसे समझू,मैंने कहा की इश्क़ कर और कर के हार जा

झूठ बोलते है वो जो कहते है की हम सब मिट्टी से बने है,मैं कई अपनों से वाक़िफ़ हूँ जो पत्थर के बने है

कुछ हार गयी तकदीर कुछ टूट गए सपने,कुछ गैरों ने बर्बाद किया कुछ छोड़ गए अपने

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