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तुझे भूलकर भी न भूल पायेगें हम! बस यही एक वादा निभा पायेगें हम! मिटा देंगे खुद को भी जहाँ से लेकिन! तेरा नाम दिल से न मिटा पायेगें हम!

मुहब्बत का इम्तिहान आसान नहीं! प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं! मुद्दतें बीत जाती हैं किसी के इंतज़ार में! ये सिर्फ पल-दो-पल का काम नहीं!

दिल को था आपका बेसबरी से इंतजार! पलके भी थी आपकी एक झलक को बेकरार! आपके आने से आयी है कुछ ऐसी बहार! कि दिल बस मांगे आपके लिये खुशियाँ बेशुमार! 

चहरे पर हंसी छा जाती है! आँखों में सुरूर आ जाता है! जब तुम मुझे अपना कहते हो, अपने पर गुरुर आ जाता है!

अगर तुम न होते तो ग़ज़ल कौन कहता! तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता! यह तो करिश्मा है मोहब्बत का! वरना पत्थर को ताज महल कौन कहता!

तुम्हारे नाम को होंठों पर सजाया है मैंने! तुम्हारी रूह को अपने दिल में बसाया है मैंने! दुनिया आपको ढूंढते ढूंढते हो जायेगी पागल! दिल के ऐसे कोने में छुपाया है मैंने!

मोहब्बत मुझे थी उसी से सनम! यादों में उसकी यह दिल तड़पता रहा! मौत भी मेरी चाहत को रोक न सकी! कब्र में भी यह दिल धड़कता रहा!

जब तक तुम्हें न देखूं! दिल को करार नहीं आता! अगर किसी गैर के साथ देखूं! तो फिर सहा नहीं जाता!

इश्क मुहब्बत तो सब करते हैं! गम – ऐ – जुदाई से सब डरते हैं हम तो न इश्क करते हैं न मुहब्बत! हम तो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने के लिए तरसते हैं! 

माना की तुम जीते हो ज़माने के लिये! एक बार जी के तो देखो हमारे लिये! दिल की क्या औकात आपके सामने! हम तो जान भी दे देंगे आपको पाने के लिये!

उदास नहीं होना, क्योंकि मैं साथ हूँ! सामने न सही पर आस-पास हूँ! पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे! मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ! 

मोहब्बत ऐसी थी कि उनको दिखाई न दी! चोट दिल पर थी इसलिए दिखाई न गयी! चाहते नहीं थे उनसे दूर होना पर! दुरिया इतनी थी कि मिटाई न गयी!

प्यार कमजोर दिल से किया नहीं जा सकता! ज़हर दुश्मन से लिया नहीं जा सकता! दिल में बसी है उल्फत जिस प्यार की! उसके बिना जिया नहीं जा सकता! 

आज असमान के तारों ने मुझे पूछ लिया; क्या तुम्हें अब भी इंतज़ार है उसके लौट आने का! मैंने मुस्कुराकर कहा; तुम लौट आने की बात करते हो; मुझे तो अब भी यकीन नहीं उसके जाने का!

माना आज उन्हें हमारा कोई ख़याल नहीं; जवाब देने को हम राज़ी है, पर कोई सवाल नहीं! पूछो उनके दिल से क्या हम उनके यार नहीं; क्या हमसे मिलने को वो बेकरार नहीं! 

रेत पर नाम कभी लिखते नहीं; रेत पर नाम कभी टिकते नहीं; लोग कहते है कि हम पत्थर दिल हैं; लेकिन पत्थरों पर लिखे नाम कभी मिटते नहीं!

महोब्बत और नफरत सब मिल चुके हैं मुझे; मैं अब तकरीबन मुकम्मल हो चोका हूँ!

इश्क के रिश्ते कितने अजीब होते है? दूर रहकर भी कितने करीब होते है; मेरी बर्बादी का गम न करो; ये तो अपने अपने नसीब होते हैं! 

वो खुद पर गरूर करते है, तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं! जिन्हें हम चाहते है, वो आम हो ही नहीं सकते!

कोई ठुकरा दे तू हंस के सह लेना; मोहब्बत की ताबित में ज़बरदस्ती नहीं होती!

ये वफ़ा तो उस वक्त की बात है ऐ फ़राज़; जब मकान कच्चे और लोग सच्चे हुआ करते थे! 

कोई अच्छा लगे तो उनसे प्यार मत करना; उनके लिए अपनी नींदे बेकार मत करना; दो दिन तो आएँगे खुशी से मिलने; तीसरे दिन कहेंगे इंतज़ार मत करना! 

कृष्ण ने राधा से पूछा: ऐसी एक जगह बताओ, जहाँ में नहीं हूँ? राधा ने मुस्कुराके कहा, `बस मेरे नसीब में`! 

अजीब खेल है ये मोहब्बत का; किसी को हम न मिले, कोई हमें ना मिला! 

फूल खिलते रहे जिंदगी की राह में; हंसी चमकती रहे आपकी निगाह में; कदम कदम पर मिले ख़ुशी की बाहर आपको; दिल देता है यही दुआ बार-बार आपको; वेलेंटाइन डे की शुभकामनाए!

कभी हँसता है प्यार, कभी रुलाता है प्यार; हर पल की याद दिलाता है यह प्यार; चाहो या न चाहो पर आपके होने का एहसास दिलाता है ये प्यार; वेलेंटाइन डे की शुभकामनाए! 

खींच लेती है मुझे उसकी मोहब्बत; वरना मै बहुत बार मिला हूँ आखरी बार उससे!

उसने देखा ही नहीं अपनी हथेली को कभी; उसमे हलकी सी लकीर मेरी भी थी!

तुम्हारे पास नहीं तो फिर किस के पास है? वो टुटा हुआ दिल, आखिर गया कहाँ! 

ये डूबने वाले का ही होता हे कोई फन; आँखों में किसी के भी समंदर नहीं होता! 

दिल की धड़कन और मेरी सदा है वो; मेरी पहली और आखिरी वफ़ा है वो; चाहा है उसे चाहत से बड़ कर; मेरी चाहत और चाहत की इंतिहा है वो!

तुम मुझे मौका तो दो ऐतबार बनाने का; थक जाओगे मेरी वफाओं के साथ चलते चलते! 

तमाम नींदें गिरवी हैं हमारी उसके पास; जिससे ज़रा सी मुहब्बत की थी हमनें! 

बस इतना ही कहा था, कि बरसो के प्यासे हैं हम; उसने अपने होठों पे होंठ रख के, हमे खामोश कर दिया! 

उनके आने के इंतज़ार में हमनें; सारे रास्ते दिएँ से जलाकर रोशन कर दिए! उन्होंने सोचा कि मिलने का वादा तो रात का था; वो सुबह समझ कर वापस चल दिए। 

बेवाफायों की इस दुनियां में संभलकर चलना मेरे दोस्तों; यहाँ बर्बाद करने के लिए, मुहब्बत का भी सहारा लेते हैं लोग!

मेरे इश्क ने सीख ली है, अब वक़्त की तकसीम… वो मुझे बहुत कम याद आता है; सिर्फ इतना – दिल की हर एक धड़कन के साथ!

बड़ी मुददत के बाद मिलने वाली थी कैद से आज़ादी; पर किस्मत तो देखो, जब आज़ादी मिलने वाली थी; तब तक पिंजरे से प्यार हो चुका था!

मेरी मोहब्बत है वो कोई मज़बूरी तो नही; वो मुझे चाहे या मिल जाये, जरूरी तो नही; ये कुछ कम है कि बसा है मेरी साँसों में वो; सामने हो मेरी आँखों के जरूरी तो नही! 

खफा न होना हमसे, अगर तेरा नाम जुबां पर आ जाये; इंकार हुआ तो सह लेंगे और अगर दुनिया हंसी, तो कह देंगे; कि मोहब्बत कोई चीज़ नहीं, जो खैरात में मिल जाये; चमचमाता कोई जुगनू नहीं, जो हर रात में मिल जाये; 

हमसे बदल गये वो निगाहें तो क्या हुआ जिंदा हैं कितने लोग मोहब्बत किये बगैर!

ना आना लेकर उसे मेरे जनाजे में; मेरी मोहब्बत की तौहीन होगी; मैं चार लोगो के कंधे पर हूंगा; और मेरी जान पैदल होगी! 

कोई छुपाता है, कोई बताता है; कोई रुलाता है, तो कोई हंसाता है; प्यार तो हर किसी को ही किसी न किसी से हो जाता है; फर्क तो इतना है कि कोई अजमाता है और कोई निभाता है!

हम रूठे तो किसके भरोसे, कौन आएगा हमें मनाने के लिए; हो सकता है, तरस आ भी जाए आपको; पर दिल कहाँ से लाये, आप से रूठ जाने के लिए! 

रात होगी तो चाँद दुहाई देगा; ख्वाबों में आपको वह चेहरा दिखाई देगा; ये मोहब्बत है, ज़रा सोचकर करना; एक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा! 

इश्क का जिसको ख्वाब आ जाता है; समझो उसका वक़्त खराब आ जाता है; महबूब आये या न आये; पर तारे गिनने का तो हिसाब आ ही जाता है!

दो दिलो की मोहब्बत से जलते हैं लोग; तरह-तरह की बातें तो करते हैं लोग; जब चाँद और सूरज का होता है खुलकर मिलन; तो उसे भी “सूर्य ग्रहण” तक कहते हैं लोग! 

छुपा लूं तुझको अपनी बाँहों में इस तरह, कि हवा भी गुजरने की इजाज़त मांगे; मदहोश हो जाऊं तेरे प्यार में इस तरह, कि होश भी आने की इजाज़त मांगे!

उनके आने के इंतज़ार में हमनें; सारे रास्ते दिएँ से जलाकर रोशन कर दिए! उन्होंने सोचा कि मिलने का वादा तो रात का था; वो सुबह समझ कर वापस चल दिए। 

मेरी मोहब्बत है वो कोई मज़बूरी तो नही; वो मुझे चाहे या मिल जाये, जरूरी तो नही; ये कुछ कम है कि बसा है मेरी साँसों में वो; सामने हो मेरी आँखों के जरूरी तो नही! 

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